نوید اخگر
شعری
برای گرامیداشت روز زن
به دری خیره مانده بود
که بر پاشنه تحمل
نیم دیگر را بر صفحه تاریخ میچرخاند
در کنار صبحی میزیست
که گلهایش، طراوت خویش را
از قطره قطره غزلهای اشک احساسش ربوده بود
احساس میکردم
روان رود کنارم
شکفته زیبائی بهار رابر قلمکارصورت زمان ترسیم
میکند
و
اوبه دیوار کلوخی خانه مان
در شهری که زلزله اش فرو خواهد کوفت
ترسیم فرش نبافته انقلابی را در سر داشت
که گلهای خونینش از سر پنجه های او رنگ میگرفت
به اطاق کوچکمان نگاه کن!
به دیوار های فرو ریخته اش
و سایبانی که حس سرنگونی را فریاد میکشد
نیمه دیگر هستی زنی بود
رسته از خاکستر خویش
ورانداز
تاریخ، زیبا تر از اندامهای قیام جلوه مینمود
پخته در کوره خورشید قهر
رستاخیزی را به آواز بر خاسته بود
که جار بلند سرو در آسمان شب زده شهر
تنها
صدای او را میشناخت.
به دیدارم بیا!
در کنارم بنشین!
و به من بگو چسان دوستت بدارم
منی که قلبم را در یک تاخت تاریخی باخته ام
به نیمه دیگری مینگرم
که هزار قناری را بسویم پرواز میدهد
و در تقابل شعله های عشق
گل ناری را بسویم پرتاب میکند.
کوران سوزنده شعله ها نیز خاکسترم نتواند کرد
برایم آتشفشانی بیار
با کوره مذاب خورشید
تا روح یخ زده قرنها سکوت را به میانش پرتاب کنم
و با دست توانای خواستن
راز هستی را از میانش برگیرم
و
عاشقت شوم
--------------------------------------------------------------------------------
خط سرخاب زای ماه
مجموعه شعری از:نوید اخگر
1
کویر را با پنجه عطش جراحی کردیم
و چاه در انتها به خاک خورد
کسی حتمیت آب را نوشیده بود.
--------------------------------------------------------------------------------
2
سرانگشتان ثانیه در احساس طپش
و غوغای نگاه
از پشت شیشه اشک.
--------------------------------------------------------------------------------
3
دخترک سینه از هوا سنگین کرد
و چشمانش
غلغله هجرت ابر ها را گلایول بست
میگویند:
بی
گمان به نیت حزنی آمده بود
که در آن
ماه و مه
به
یکسان
منکوب
بوده اند.
--------------------------------------------------------------------------------
4
بر انحنای ساقه تب
شبنم غربت
و بر موجگون خزر
غطان قطره ای
بر
گونه فقر
وقتی
که حادثه نیز
از صحنه اتفاق
دزدیده
میشود.
--------------------------------------------------------------------------------
5
در گلخانه دلم سه گل کاشتم
که باد حادثه
هر یک را
به
دیاری کشید
گل پرنده در قفس دل
گل دوستی در خزان ارزشها
گل ستیز
در
فصل خیانت
--------------------------------------------------------------------------------
6
مفهوم
مرگ
چون
هیهای کفتاری
بر گذرگاه لاشه ای پوسیده
بر اعماق جانش خنج میکشید
و تیغش آفتاب
بر
پیشانی کبود آسمان
می بست
لبخند
نازکی
بر
چهره بابونه
در
صبح پیر.
--------------------------------------------------------------------------------
7
ستایشگران بی حجاب رسوا
راهبان دیرهای مسکین فضل
به
پای دارنده ادعا های موهوم
نادمین
پرستشگاههای خون
تسلیم
شوندگان به فضیلتهای حقیر.
--------------------------------------------------------------------------------
8
قد بیفراز
و مجنون وار
دانه های محبت ستیزخلق را بر جلاد و
بر
شالیزار های جان انسان بپاش!
زیرا که نادمان امروز
حاکمان فردایند.
--------------------------------------------------------------------------------
9
صدای
گرم نفسهای اطلسی
زیر نگاه خورشید
صدای ثانیه ها بود
زیرا که آتش بوسه
راه بر دامن شقایق برد
و تو دیدی
و چشم بر هم نهادی
لیکن
راز عشق سر به مهر نماند.
--------------------------------------------------------------------------------
10
گندمگون
کشتزار رسیده عشق
تصویر های شعله
در آئینه رستن از خاکند
دستم را بگیر
و شعله جانم را
بر جان شب بکوب
تا نادمان پهنه ستیز را
مشعلی باشی
مهیا
بر بستر انقلاب.
نوید اخگر
28
جولای سال 2004 میلادی
سوئد استکهلم
--------------------------------------------------------------------------------
نه آن بیهوده گوئی را مانم
که نحیف ساقه درد را
در مقیاس پوچ
به
آتشدان نومیدی می سپارد
نه
در هجوم لغت به هستی فکر
نه در تسلیتی بر مرگ عزیزی
با یاد لحظه ای که سینه دریده کبوتری
در فراخنای حادثه
دوخته
میشود
با
یاد قناریهای فکرت
و
تخم شکفته التهاب
در
ظرف زمان.
--------------------------------------------------------------------------------
مرا با خود ببر
به صحرائی که شنهایش اسیر باد نیستند
و به دشتی که ستاره هایش
در
دورانی جاودان جامد نمی گردند
مرا
با خود ببر
به
سرزمینی که عشق محصول خواستن نیست
مرا با خود ببر
بر
مداری که زندگی را مرگ پیگرد گسستن نیست
مرا با خود ببر
--------------------------------------------------------------------------------
ساق هایم را به سرو
چشمهایم را به ابر
فکرم را به دریا
قلبم را به پروانه
و دستهایم را به ستیز تیزی که در کف میفشاری
بخشیدم
نان را برایم ارمغان آور.
--------------------------------------------------------------------------------
برکه کوچکی را که بمن نمودی
دوست میداشتم
جائی برای ستاره های دریائی فکرم بجو!
--------------------------------------------------------------------------------
ریزه خوان عزائم نیستم
چکاوکم
صلیب من
شاخک نارونی است در خانه همسایه.
--------------------------------------------------------------------------------
جامه عقیقی مهتاب را دریدند
و بکارت ماه را بغارت بردند
باید جست
سیمرغ فضیلت
قهر را.
--------------------------------------------------------------------------------
عاشقانه های نگاه میزبان و میهمان
شمعدانی ها را
در تحیر شعله خویش سوزاند.
--------------------------------------------------------------------------------
شانه بر گیسوان خزه کشیدم
و دست بر رخ ماه
عشق تو اما در خشکنای هلهله
پر
پر میزند.
--------------------------------------------------------------------------------
زیبا ترین شعرم
کورسوئی چشمک زن
در دهلیز واقعیتهاست
بازیگوش
در شبچراغ شهر
--------------------------------------------------------------------------------
گردنبند مروارید عشق
بر
روی دفتر شعرم
از هم گسیخت.
--------------------------------------------------------------------------------
غوغا چشمک میزند
تنها بر جای ماندگانند
فروزنده آتشها
تسلیم
ناشوندگان
به
فضیلتهای حقیر.
--------------------------------------------------------------------------------
دختر آنجا ایستاده بود
رو در روی حادثه
بادهای خون آلود
و دنده دندانهائی شکسته
نامش هزاره شعر است.
--------------------------------------------------------------------------------
علف احساس ترش را از باران
لاله رنگین جامه اش را از خاک
عصیان شعله را
در پروانه باید جست.
--------------------------------------------------------------------------------
سهم شبنم
از دیده ی عاطفه ابر
بر
کویر تفته محبت کو؟
--------------------------------------------------------------------------------
رنگین کمان نگاهت
تلاقی گریه ابر بود و
خنده خورشید
--------------------------------------------------------------------------------
تهمتن قلب را پرواز ده
چونان چون پرندی گریزان از خویش
تا در میان آنکه دوست میدارد
بی
کس
و
با همه باشد.
--------------------------------------------------------------------------------
صدای پرنده
در قفس جانم
پر پر میزند.
--------------------------------------------------------------------------------
صدای قلب چکاوک
و بوسه های تفته پروانه
به
میخک آبی.